प्रतापगढ़ (ABK24NEWS)। सोमवार का दिन प्रतापगढ़ के प्रशासनिक हलके और ग्रामीण इलाकों में खासी हलचल वाला रहा। जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय जब जमीनी हकीकत परखने अचानक चौपालों और गलियों में उतरे, तो एक तरफ जहां विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वालों के हाथ-पांव फूल गए, वहीं दूसरी तरफ सालों से बेघर एक लाचार महिला की आंखों में उम्मीद की नई किरण चमक उठी।
मामला तहसील पट्टी के ग्राम मनैतापुर का है, जहां त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें लगातार डीएम तक पहुंच रही थीं। बिना किसी पूर्व सूचना के जब जिलाधिकारी का काफिला गांव में रुका, तो ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। डीएम ने मौके पर उतरकर ईंट और गिट्टी की गुणवत्ता खुद परखी। उन्होंने तुरंत निर्माण सामग्री का सैंपल सील करवाकर जांच के लिए पीडब्ल्यूडी की लैब में भेजने के कड़े निर्देश दिए। सख्त लहजे में हिदायत दी कि “मानकों से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा; गड़बड़ी मिली तो सीधी कार्रवाई होगी।”
निरीक्षण का यह कारवां यहीं नहीं रुका। इसके बाद डीएम का रुख ग्राम उतरास की ओर हुआ, जहां रेखा मिश्र पत्नी राजन मिश्र लंबे समय से भूमिहीन होने के कारण बदहाली का जीवन जी रही थीं। महिला की व्यथा सुनते ही जिलाधिकारी का संवेदनशील रूप सामने आया। उन्होंने मौके पर मौजूद लेखपाल को तुरंत नियमानुसार पट्टा जारी करने और दान में मिली जमीन पर तुरंत कब्जा दिलाने का हुक्म दिया।

डीएम ने सख्त टाइमलाइन तय करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर महिला के आवास निर्माण का काम शुरू हो जाना चाहिए। साथ ही आपदा राहत कोष से अहेतुक सहायता राशि भी तत्काल मुहैया कराने को कहा। इस दौरान एडीएम (वि./रा.) आदित्य प्रजापति सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। डीएम के इस कड़े तेवर और संवेदनशील रुख की चर्चा पूरे जिले में बनी हुई है।










