प्रतापगढ़ (ABK24NEWS)। अपनी विभिन्न लंबित मांगों और वेतन विसंगतियों को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने अपनी मांगों के समर्थन में एक बड़े चरणबद्ध आंदोलन का खाका तैयार किया है। तहसील अध्यक्ष सचिन यादव एवं तहसील मंत्री विकास यादव के नेतृत्व में संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
आखिर क्यों आंदोलन कर रहे हैं लेखपाल?
संघ के अनुसार, लेखपालों की प्रमुख समस्याएं और मांगें:-
- 2800 ग्रेड पे: पिछले 10 वर्षों से लेखपालों के प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे की मांग और वेतन विसंगति को दूर न किया जाना।
- स्थानांतरण व पदोन्नति: विगत 8 वर्षों से लेखपालों का अंतर-मंडलीय स्थानांतरण न होना और 2 वर्षों से पदोन्नति सूची जारी न होना।
- भत्ते व पदनाम: पिछले 16 वर्षों से भत्तों में कोई वृद्धि न होना तथा उच्च तकनीकी कार्यों के निष्पादन हेतु लैपटॉप व मोबाइल उपलब्ध न कराना। इसके अलावा तकनीकी पद घोषित न करना।
- कार्यमुक्त न करना व शोषण: परिषदादेश के बावजूद पटलों से न हटाया जाना, प्रभारी राजस्व निरीक्षक के कार्यों से अवमुक्त न करना और ग्राम सचिवालय में बिना आधारभूत सुविधाओं के शोषण करना।
- परिणाम व स्थायीकरण: पिछले 1 वर्ष से तहसील वार लेखपालों का परीक्षा परिणाम घोषित न होना या स्थायीकरण न होना।

चरणबद्ध आंदोलन का पूरा शेड्यूल:
संघ ने आंदोलन को गति देने के लिए तारीखवार कार्यक्रमों की घोषणा की है:-
- 03.10.2026 (शनिवार): तहसील दिवस का बहिष्कार और तहसील स्तर पर धरना प्रदर्शन।
- 08.10.2026 (गुरुवार): समस्त ऑनलाइन कार्यों का पूर्ण बहिष्कार।
- 10.10.2026 (शनिवार): थाना दिवस पर काली पट्टी बांधकर विरोध स्वरूप कार्य करना।
- 12.10.2026 (सोमवार): तहसील व जिला मुख्यालय पर रक्तदान शिविर लगाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन।
- 14.10.2026 (बुधवार): विशाल मोटर साइकिल रैली का आयोजन।
- 17.10.2026 से 23.10.2026 तक: तहसील मुख्यालय पर निरंतर धरना प्रदर्शन।
- 24.10.2026 से (अनिश्चितकालीन): जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन की शुरुआत।
लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर पर उनकी जायज मांगों का निस्तारण जल्द नहीं किया गया, तो वे जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस मौके पर सदर तहसील के सभी लेखपाल मौजूद रहे।










