- प्रतापगढ़ में पूर्ति विभाग के संविदा ऑपरेटर सौरभ विश्वकर्मा की हत्या से मचा कोहराम
- पत्नी और मां की चीखों से दहला इलाका, कार्रवाई के आश्वासन पर 4 दिन बाद शृंगवेरपुर घाट पर हुआ अंतिम संस्का र
प्रतापगढ़। (ABK24NEWS)
सिर्फ एक साल पहले जिस आंगन में शहनाइयां गूंजी थीं और जिसकी दीवारों पर शादी की खुशियों के रंग अभी फीके भी नहीं पड़े थे, आज उसी आंगन से चीखों और सिसकियों का दर्दनाक सैलाब उमड़ रहा है। गोद में महज़ चार महीने की दुधमुंही बच्ची, आंखों में बेहिसाब दर्द और कांपते हाथों से पति के ठंडे पड़े शरीर से लिपटती आंचल की चीख-पुकार ने वहां मौजूद हर शख्स के कलेजे को छलनी कर दिया।
“इन्हें मत ले जाओ… कोई तो मेरे सौरभ को लौटा दो!” — यह शब्द किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी थे। पास ही बैठी मां हीरावती अपने “लल्ला” का चेहरा बार-बार चूमकर फफक-फफक कर रो रही थीं। प्रतापगढ़ के लीलापुर थाना क्षेत्र के हरिहरपुर सिंधौर गांव का माहौल रविवार को कुछ ऐसा ही था, जहां 30 वर्षीय संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ विश्वकर्मा के अंतिम संस्कार के दौरान हर आंख नम और हर दिल आक्रोशित था।
मासूम की बेबस निगाहें और सिस्टम के सामने चार दिन तक अड़ा परिवार
महज़ चार महीने की मासूम बच्ची, जिसे अभी यह भी नहीं मालूम कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है, कभी अपनी मां के रोते चेहरे को देखती तो कभी आसपास जमा लोगों की भीड़ को।
सौरभ की निर्मम हत्या के बाद गुस्साए और टूटे हुए परिजनों ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर 4 दिनों तक शव का अंतिम संस्कार रोक रखा था। परिजनों की 6 मुख्य मांगे थीं:
- सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी।
- आरोपियों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई।
- आरोपियों के सरकारी सस्ते गल्ले (कोटे) का लाइसेंस रद्द करना।
- मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी।
- पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा।
- सुरक्षा के लिए पत्नी के नाम शस्त्र लाइसेंस।
चार दिनों तक गांव में तनाव का माहौल बना रहा। नेताओं और पुलिस अफसरों का जमावड़ा लगा रहा। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित परिवार से बात कर ढांढस बंधाया और कार्रवाई का भरोसा दिया। रविवार को विश्वनाथगंज विधायक जीतलाल पटेल, भाजपा नेता बिंदेश्वरी तिवारी और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही परिवार अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुआ। इसके बाद शव को शव वाहन से शृंगवेरपुर घाट ले जाकर अंतिम विदाई दी गई।
14 अगस्त की वो काली रात: ‘8-10 लोगों ने लाठी-डंडों और बंदूक की बट से पीटा’
लालगंज के पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में संविदा पर कार्यरत सौरभ विश्वकर्मा 14 अगस्त (गुरुवार रात) को अपनी ड्यूटी खत्म कर बाइक से घर लौट रहे थे। जैसे ही वे लक्ष्मणपुर के पास पहुंचे, घात लगाए बैठे 8 से 10 दबंगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
अस्पताल में जिंदगी की अंतिम सांसें गिनते हुए सौरभ ने जो बयान दिया, वह दिल दहला देने वाला था। सौरभ ने बताया कि पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय उर्फ बड़े तिवारी, उनके परिजनों व साथियों ने उन्हें रास्ते में रोककर लाठी-डंडों से बेदर्दी से पीटा, पैर तोड़ दिया और गर्दन पर बंदूक की बट से जानलेवा वार किया। गंभीर रूप से घायल सौरभ को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया।


खाद्यान्न और ईमानदारी की रंजिश: 4 महीने पहले भी हुई थी घर पर फायरिंग
परिजनों का आरोप है कि यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। आरोपी लक्ष्मणपुर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय उर्फ बड़े तिवारी और उनका परिवार क्षेत्र में रसूख रखता है। उनका भाई सोनू तिवारी कोटेदार है। राशन कार्ड से जुड़े एक गलत/अवैध काम को पास न करने पर आरोपियों ने सौरभ से रंजिश पाल ली थी।
मृतक के पिता मोतीलाल विश्वकर्मा ने बताया कि करीब चार महीने पहले भी आरोपियों ने उनके घर पर 6-7 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। उस समय भी पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन अगर समय रहते कड़ी कार्रवाई हो जाती, तो आज सौरभ जिंदा होता।

पुलिस और प्रशासन का एक्शन: 3 आरोपी गिरफ्तार, कोटे की दुकान सील
घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय उर्फ बड़े तिवारी, सौरभ तिवारी, दरोगा तिवारी, सोनू, अनुज, अशोक तिवारी समेत 6 नामजद और 8-10 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
अब तक की कार्रवाई: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अवधेश तिवारी, सौरभ तिवारी और मिंटू उपाध्याय समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
प्रशासनिक चाबुक: घटना से जुड़े आरोपियों के सरकारी सस्ते गल्ले (राशन दुकान) की जांच की गई। जांच में भारी अनियमितता और खाद्यान्न कम पाए जाने पर एसडीएम लालगंज वाचस्पति सिंह और सीओ राजीव द्विवेदी की मौजूदगी में डांडी ग्राम सभा की कोटे की दुकान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सील कर दिया गया है।
सवालों के घेरे में खाकी और समाज की संवेदनाएं
जब अंतिम संस्कार से पहले हंगामे का माहौल था, तब एक वाकया ऐसा भी हुआ जिसने सभी का ध्यान खींचा। मौके पर पहुंचे एक स्थानीय नेता जब सांत्वना देने पहुंचे, तो लीलपुर थाना प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र कुमार सिंह ने माहौल को गरमाते देख हस्तक्षेप किया और सख्त रुख अपनाते हुए स्थिति को संभाला।
हालांकि, इस पूरी त्रासदी का सबसे कड़वा सच यह है कि एक ईमानदार और मेहनती नौजवान की बलि चढ़ गई। एक चार महीने की बच्ची बिना बाप के बड़ी होगी और एक नवविवाहिता का जीवन भर का सहारा छीन गया। गांव के लोग सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं— “क्या हत्यारों को ऐसी सजा मिलेगी जो इस बेबस मां और पत्नी के आंसुओं का हिसाब कर सके?”










