- माँ बेल्हा देवी धाम स्थित शिव मंदिर में लगी भीड़।
विनय पाठक:
प्रतापगढ़ (ABK24NEWS)। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला हरितालिका तीज का पावन पर्व प्रतापगढ़ जनपद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पूरी श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला उपवास रखकर भगवान शिव एवं माता पार्वती की विधि-विधान से उपासना की।
सुबह तड़के से ही शहर के प्रमुख देवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। विशेष रूप से, सई नदी तट पर स्थित प्रसिद्ध मां बेल्हा देवी धाम परिसर के शिव मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। रंग-बिरंगी साड़ियों और पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाओं ने हाथों में पूजा की थाली लेकर अपनी बारी का इंतज़ार किया। थाली में बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल, शमी पत्र, फल, दीप और सुहाग की सामग्री विशेष रूप से सजाई गई थी।

मां बेल्हा देवी धाम परिसर में पूरे दिन ‘हर-हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारे गूंजते रहे। महिलाओं ने शिवलिंग पर दूध, जल और शहद से अभिषेक किया तथा माता पार्वती को सुहाग का सामान अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। मंदिर प्रांगण में महिलाओं के समूहों ने एकत्रित होकर हरितालिका तीज की पौराणिक व्रत कथा सुनी और भक्ति गीतों पर कीर्तन किया।
यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें महिलाएँ पूरे 24 घंटे बिना अन्न और जल के रहती हैं। अगले दिन प्रातःकाल पूजन और पारणा के बाद ही व्रत पूर्ण होता है। बेल्हा देवी धाम पर पूजन करने आईं श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान भोलेनाथ की भक्ति ही उन्हें इस कठिन साधना को पूरा करने की शक्ति देती है।

इसके अलावा शहर के दीपेश्वर महादेव मंदिर, बाबा घुइसरनाथ धाम और विभिन्न मोहल्लों के शिवालयों में भी तीज पर्व का उल्लास बना रहा। सुरक्षा एवं व्यवस्था की दृष्टि से बेल्हा देवी धाम और अन्य प्रमुख मंदिरों पर पुलिस प्रशासन द्वारा भीड़ नियंत्रण के उचित इंतजाम किए गए थे, जिससे महिलाओं को पूजा-अर्चना में कोई कठिनाई न हो।









