- भीलमपुर (प्रतापगढ़) में आईजीआरएस शिकायतों के बाद भी प्रशासन बेखबर, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
- श्रमदान कर मिट्टी डालने पहुंचे ग्रामीणों को दबंगों ने गाली-गलौज कर भगाया, वीडियो वायरल।
- गाटा संख्या 119, 120 ख, 121, 122 और 123 ख की राजस्व पैमाइश व पक्के निर्माण की उठी मांग।
प्रतापगढ़। जनपद के सदर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बहलोलपुर के ग्राम भीलमपुर में दबंगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें न तो कानून का भय है और न ही प्रशासनिक कार्रवाई का। प्राथमिक विद्यालय बहलोलपुर को जोड़ने वाला एकमात्र मुख्य रास्ता लंबे समय से घुटनों तक कीचड़ और जलजमाव में तब्दील होकर नारकीय बन चुका है। जब बदहाली से तंग आकर ग्रामीणों ने स्वप्रेरणा से श्रमदान कर रास्ते पर मिट्टी डालने का प्रयास किया, तो गांव के दबंगों ने अपनी दबंगई दिखाते हुए उन्हें गाली-गलौज कर भगा दिया और सीधे शब्दों में धमकी दी— “चाहे जहाँ शिकायत करनी हो कर लो, कीचड़ में जाना हो तो जाओ, लेकिन मिट्टी नहीं पड़ने देंगे।”

नौनिहालों के भविष्य पर दबंगई का साया
विद्यालय जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे हर रोज इसी दलदल से होकर गुजरने को मजबूर हैं। आए दिन बच्चे कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं, उनकी ड्रेस और कापियां खराब हो रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का साफ आरोप है कि यह रास्ता कोई निजी संपत्ति नहीं बल्कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज रास्ता (गाटा संख्या 120 ख) है। दबंगों की नीयत रास्ते को जानबूझकर कीचड़युक्त बनाए रखने की है ताकि वे आस-पास की कीमती सरकारी जमीन पर अपना वर्चस्व और अवैध कब्जा कायम रख सकें।
सरकारी जमीनों पर कब्ज़े का खेल
भू-अभिलेखों के अनुसार, उक्त स्थल पर केवल रास्ता ही नहीं, बल्कि:
गाटा सं. 120 ख: मुख्य रास्ता
गाटा सं. 123 ख: विद्यालय की जमीन
गाटा सं. 121: नवीन परती
गाटा सं. 122: खेल का मैदान
गाटा सं. 119: खलिहान
जैसी करोड़ों की बहुमूल्य शासकीय भूमि दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के रसूखदार कृष्ण कुमार सिंह, शिव शंकर सिंह व उनके अन्य सहयोगियों ने इन जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है। जब भी कोई जनहित में आवाज़ उठाता है या रास्ते के सुधार का प्रयास करता है, उसे जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।
आईजीआरएस पर शिकायतें बेअसर, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री संदर्भ (आईजीआरएस) पोर्टल सहित तहसील स्तर पर दर्जनों बार ऑनलाइन व लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं। बावजूद इसके, न तो आज तक कोई राजस्व टीम मौके पर पैमाइश करने पहुंची और न ही दबंगों पर कोई सख्त कार्रवाई हुई। प्रशासन की इस आपराधिक उपेक्षा से ग्रामीणों का गुस्सा अब फूट पड़ा है।
लामबंद ग्रामीणों की चेतावनी— “कार्रवाई न हुई तो होगा उग्र आंदोलन”
गांव के आशुतोष प्रताप सिंह, रघुनंदन सिंह, राजेश सिंह उर्फ भोले, रमाशंकर सिंह, राम बहादुर पाल, शिव बहादुर पाल, बेचू पाल, सुरेश सरोज, बृजभूषण सरोज, रामकुमार गौतम, सुनील गौतम, संपत, मगन सिंह, विनीता सिंह, शशिलता सिंह, नीलम सिंह, राम जी, अरुण सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी प्रतापगढ़ व पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि:
विवादित गाटा संख्याओं (119, 120 ख, 121, 122, 123 ख) की तत्काल वरिष्ठ राजस्व टीम से निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए।
सरकारी जमीन से दबंगों का अवैध कब्जा तुरंत हटाकर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई (FIR) की जाए।
प्राथमिक विद्यालय जाने वाले मुख्य मार्ग का प्राथमिकता के आधार पर पक्का (आरसीसी/इंटरलाकिंग) निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासनिक अमला हरकत में नहीं आया और रास्ते का निस्तारण नहीं हुआ, तो वे जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन व धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ग्रामीणों ने रास्ते को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी से मिलने की बात बताई है।









