- असिस्टेंट कमाण्डेंट से सफल ऑर्गेनिक फार्मर बनने तक: उत्कृष्ट पाण्डेय की प्रेरक दास्तान।
(विनय पाठक)
प्रतापगढ़ (abk24news)। आधुनिक कृषि के इस दौर में जहां अधिकांश किसान रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर निर्भर हैं, वहीं जनपद प्रतापगढ़ के विकास खण्ड मंगरौरा के ग्राम भदौना निवासी युवा किसान उत्कृष्ट पाण्डेय ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने जैविक खेती (Organic Farming) को अपनाकर न केवल अपनी एक अलग पहचान बनाई है, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
उनकी सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि आधुनिक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता के साथ काम किया जाए, तो खेती भी सम्मानजनक आय और आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त माध्यम बन सकती है।
देश सेवा की नौकरी छोड़, चुना धरती मां की सेवा का रास्ता
उत्कृष्ट पाण्डेय का यह सफर बेहद साहसिक रहा है। लगभग दस वर्ष पूर्व वे पैरामिलिट्री में असिस्टेंट कमाण्डेंट के प्रतिष्ठित पद पर तैनात थे। लेकिन अपनी माटी के लिए कुछ करने की चाह में उन्होंने इस गौरवशाली नौकरी को छोड़ दिया और गांव लौटने का बड़ा निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
पारंपरिक खेती के ढर्रे से अलग हटकर उन्होंने पूरी तरह से जैविक खेती को अपनी कर्मभूमि बनाया। आज वे अपने ‘ऋषि ग्राम ऑर्गेनिक्स मण्डल’ नामक फर्म के माध्यम से न केवल खुद आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं, बल्कि आसपास के गांवों के किसानों को भी इस मुहिम से जोड़ रहे हैं।
“खेती केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।”
— उत्कृष्ट पाण्डेय

सफेद चंदन की खेती: भविष्य के लिए दीर्घकालिक निवेश
उत्कृष्ट पाण्डेय की सबसे बड़ी और अनूठी उपलब्धियों में से एक है उनके फार्म पर सफेद चन्दन की खेती। उन्होंने अपने फार्म हाउस परिसर में लगभग 2500 सफेद चन्दन के पौधे रोपित किए हैं। बाजार में अत्यधिक मांग के कारण चंदन को एक बहुमूल्य वृक्ष माना जाता है।
उत्कृष्ट ने अपनी कोशिशों को सिर्फ अपने खेतों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने फार्म पर ही सफेद चन्दन की एक उच्च स्तरीय नर्सरी भी विकसित की है, जहां से वे अन्य इच्छुक किसानों को भी गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध करा रहे हैं ताकि क्षेत्र के अन्य किसान भी इस लाभकारी दीर्घकालिक निवेश से जुड़ सकें।
काली, पीली और कस्तूरी हल्दी का कमाल
चंदन के साथ-साथ उत्कृष्ट ने औषधीय और विशिष्ट फसलों को भी अपने कृषि मॉडल का हिस्सा बनाया है। वे लगभग दो एकड़ भूमि में पीली, काली और कस्तूरी हल्दी की खेती कर रहे हैं। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इन विशेष किस्मों की बाजार में सामान्य हल्दी की तुलना में कई गुना अधिक कीमत मिलती है। वे अन्य किसानों को इसका उन्नत बीज भी मुहैया करा रहे हैं जिससे क्षेत्र में औषधीय खेती का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
‘ऋषि ग्राम’ ब्रांड: वैल्यू एडिशन से बढ़ी आय
उत्कृष्ट पाण्डेय का मानना है कि केवल फसल उगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उत्पादों का प्रसंस्करण (Processing) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) ही किसानों की आय बढ़ाने की असली चाबी है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने जैविक उत्पादों को बाजार में उतारने के लिए ‘ऋषि ग्राम’ ब्रांड की स्थापना की।
उनके फार्म पर तैयार होने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:
- शुद्ध बिलौना घी
- औषधीय हल्दी पाउडर
- विटामिन-सी से भरपूर आंवला मुरब्बा
- सुगंधित काला नमक चावल
- शुद्ध अरहर दाल और अन्य जैविक उत्पाद
आज स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण उनके ‘ऋषि ग्राम’ ब्रांड के उत्पादों की मांग सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी तेजी से बढ़ रही है।
वार्षिक आय 10 से 12 लाख: युवाओं के लिए रोल मॉडल
जैविक खेती, पौध उत्पादन, प्रोसेसिंग और डायरेक्ट मार्केटिंग के इस बेहतरीन एकीकृत मॉडल (Integrated Model) के जरिए उत्कृष्ट आज प्रतिवर्ष 10 से 12 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह कामयाबी समाज की इस पुरानी धारणा को तोड़ती है कि खेती घाटे का सौदा है।
आज उनका यह फार्म सिर्फ एक खेत नहीं, बल्कि दूर-दूर से आने वाले किसानों के लिए एक प्रशिक्षण और प्रेरणा केंद्र बन चुका है। यहां किसान आकर जैविक खेती, नर्सरी प्रबंधन और विपणन (Marketing) के गुर सीखते हैं। उत्कृष्ट समय-समय पर निःशुल्क कार्यशालाएं आयोजित कर कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के व्यावहारिक उपाय साझा करते हैं, जिससे प्रभावित होकर अब क्षेत्र के दर्जनों किसान रासायनिक खेती छोड़कर जैविकता की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।







