ABK24NEWS (विनय पाठक)
प्रतापगढ़। नगर पालिका परिषद बेल्हा के अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ किया है कि एंटी करप्शन टीम द्वारा लिपिक प्रशांत सिंह की गिरफ्तारी का नगर पालिका परिषद बेल्हा से कोई सरोकार नहीं है। अधिशासी अधिकारी ने तथ्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि लिपिक प्रशांत सिंह को उनके विरुद्ध लगे विभिन्न गंभीर आरोपों के कारण 12 सितंबर 2025 को ही सेवा से निलंबित किया जा चुका है। वर्तमान में उनके खिलाफ विभागीय जांच समिति द्वारा जांच की प्रक्रिया चल रही है। राकेश कुमार ने मीडिया को बताया कि यह पूरा प्रकरण नगर पंचायत ढकवा और वहां के अधिशासी अधिकारी अभिनव यादव व कर्मचारियों से संबंधित है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस घटनाक्रम से नगर पालिका परिषद बेल्हा के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का कोई लेना-देना नहीं है। विभाग की छवि को इस प्रकरण से जोड़ना पूरी तरह गलत है।

लिपिक की गिरफ्तारी से बेल्हा नगर पालिका में क्यों मचा है हड़कंप
ईओ की ‘सफाई’ पर उठे सवाल: क्या पर्दे के पीछे कुछ बड़ा है?
प्रतापगढ़। एंटी करप्शन टीम द्वारा लिपिक प्रशांत सिंह की गिरफ्तारी ने नगर पालिका परिषद बेल्हा की नींद उड़ा दी है। शनिवार को अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन उनके स्पष्टीकरण ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। शहर में चर्चा है कि “दाल में कुछ काला है”, जिसके कारण अधिकारी को इतनी सफाई देनी पड़ रही है। ईओ राकेश कुमार ने प्रेस वार्ता में यह कहकर सबको चौंका दिया कि आरोपी लिपिक प्रशांत सिंह मुख्य रूप से नगर पंचायत ढकवा का कार्य देखते थे, लेकिन बेल्हा नगर पालिका के एमआरएफ सेंटर (कूड़ा निस्तारण केंद्र) का प्रभार भी उन्हीं के पास था। ईओ के अनुसार, प्रशांत सिंह को नगर पालिका बेल्हा से “आधी तनख्वाह” मिलती थी और वह यहाँ केवल रिपोर्टिंग करने आते थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि जो कर्मचारी 12 सितंबर 2025 से निलंबित बताया जा रहा है, उसके वेतन और कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारी इतने सुरक्षात्मक क्यों हैं? सूत्रों का दावा है कि प्रशांत सिंह लंबे समय से नगर पालिका से संबद्ध रहा है, जिसके चलते उसकी विभाग में गहरी पैठ और जबरदस्त हनक थी। एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद जिस तरह से नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी अपने बचाव की मुद्रा में आए हैं, उससे यह संदेह गहरा गया है कि कहीं इस भ्रष्टाचार के तार नगर पालिका के अन्य बड़े चेहरों से तो नहीं जुड़े हैं? जानकारों का मानना है कि ईओ द्वारा दी जा रही लगातार सफाई असल में खुद को बचाने का एक प्रयास है। यदि नगर पालिका का इस भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं है, तो विभाग के भीतर इतनी बेचैनी क्यों है? क्या एमआरएफ सेंटर के नाम पर चल रहे खेल की परतें खुलने का डर अधिकारियों को सता रहा है? इस मामले ने पूरे जनपद के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है।








