भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाह और शिव-पार्वती प्रसंग से भक्तिमय हुआ पांडाल

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प्रतापगढ़। जोगापुर स्थित जी.एस. प्राइड होण्डा एजेंसी के पीछे आयोजित ‘श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान महायज्ञ’ के सातवें एवं विश्राम दिवस पर रविवार को भक्ति की अविरल गंगा बही। कथा व्यास श्री मोहित जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव-पार्वती के विवाह प्रसंग का ऐसा सजीव चित्रण किया कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।

श्रीकृष्ण के 16108 विवाह का आध्यात्मिक रहस्य:

विश्राम दिवस की कथा का शुभारंभ करते हुए महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा 16108 विवाहों के प्रसंग को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह मात्र भौतिक विवाह नहीं, बल्कि परमात्मा का अपनी जीवात्माओं से मिलन था। उन्होंने नरकासुर के वध और वहां से मुक्त कराई गई कन्याओं को समाज में सम्मान दिलाने के लिए प्रभु द्वारा उन्हें अपनाने की कथा सुनाकर नारी शक्ति के सम्मान का संदेश दिया।

महाशिवरात्रि पर गूँजा ‘हर-हर महादेव’:

संयोगवश रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व होने के कारण कथा पांडाल शिवमय नजर आया। महाराज जी ने भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह की कथा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि शिव कल्याण के देवता हैं और उनका विवाह सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है। शिव-विवाह के भजनों पर श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खोकर नाचने लगे और पूरा क्षेत्र जयकारों से गुंजायमान हो गया।

यजमान परिवार ने किया पूजन:

मुख्य यजमान सुरेश कुमार सिंह एवं श्रीमती निर्मला सिंह ने व्यास पीठ की आरती उतारी और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में मयंक मौलि सिंह, चंद्रमौलि सिंह सहित समस्त सिंह परिवार ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन समिति के अनुसार, 16 फरवरी (सोमवार) को कथा की पूर्णाहुति एवं हवन होगा, जबकि 17 फरवरी (मंगलवार) को विशाल महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन किया जाएगा।

 

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Author: ABK 24 News

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