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(राकेश मिश्रा)
बीरपुर-प्रतापगढ़। विकास खंड शिवगढ़ के अंतर्गत ग्राम सभा बीरापुर में जंगली सूअरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि किसान अब खेती करने से कतराने लगे हैं। बीती रात सूअरों के एक झुंड ने क्षेत्र के कई किसानों की तैयार आलू की फसल को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
एक ही रात में उजाड़ दिए कई खेत
पीड़ित किसान रामकरन शर्मा ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीद के साथ अपने पांच बिस्वा खेत में आलू की बुवाई की थी। लेकिन रात के अंधेरे में आए सूअरों के झुंड ने पूरी फसल खोदकर बर्बाद कर दी। यही हाल पड़ोसी किसान राम केवल यादव का भी हुआ; उनके खेत में भी बोई गई आलू की फसल को सूअरों ने पूरी तरह नष्ट कर दिया है। सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए।
खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे अन्नदाता
बीरापुर और आसपास के इलाकों में सूअरों का खौफ इस कदर व्याप्त है कि पिछले कई वर्षों से अधिकांश किसानों ने आलू और अन्य सब्जियों की खेती करना ही बंद कर दिया है। किसानों का कहना है कि:
- दिन-रात की रखवाली के बावजूद फसलें सुरक्षित नहीं हैं।
- लागत और मेहनत लगाने के बाद भी हाथ में सिर्फ बर्बादी आती है।
- आने वाले समय में गांव में सब्जियों का अकाल पड़ने की आशंका है।
सरकार और प्रशासन की उदासीनता से रोष
स्थानीय ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि सरकार ‘अन्नदाता’ के हितों की बात तो करती है, लेकिन धरातल पर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कागजी दावों के विपरीत, जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
“क्या शासन की मंशा सिर्फ फाइलों तक सीमित है? अगर जल्द ही इन जंगली सूअरों से निजात दिलाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।” — स्थानीय पीड़ित किसान
क्षेत्र के किसानों ने सामूहिक रूप से सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि बर्बाद हुई फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए और जंगली जानवरों को रोकने के लिए प्रभावी घेराबंदी या अन्य उपाय किए जाएं।








