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रानीगंज (प्रतापगढ़)। तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तुलसीपुर गाँव में चल रही सात दिवसीय दिव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। यह विशाल धार्मिक अनुष्ठान मुख्य यजमान श्री अशोक कुमार तिवारी एवं श्री अनिल तिवारी जी के आवास पर आयोजित किया गया था, जहाँ सात दिनों तक समूचा क्षेत्र भक्ति के सागर में सराबोर रहा।

अंतिम दिन सुदामा चरित्र ने सबको रुलाया
कथा के मुख्य वाचक और कुलगुरु पंडित शेषधर मिश्र जी ने अपने मुखारविंद से संगीतमय कथा का रसपान कराया। कथा के चतुर्थ दिवस पर पंडाल में भगवान श्री कृष्ण का भव्य जन्मोत्सव मनाया गया था, जिसमें सोहर और भजनों पर भक्त झूम उठे थे। वहीं, कथा के समापन दिवस पर व्यासपीठ से भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का अत्यंत मार्मिक और जीवंत वर्णन किया गया।
कुलगुरु पंडित शेषधर मिश्र ने सुदामा जी की दीन-हीन दशा और द्वारिका आगमन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और सच्ची भक्ति की सबसे बड़ी मिसाल है। जब सुदामा द्वारिका पहुंचे, तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण ने राजाधिराज होते हुए भी लोक-लाज की परवाह किए बिना अपने बाल सखा को गले से लगा लिया और सिंहासन पर बैठाकर अपने आंसुओं से उनके चरण धोए। भगवान ने सुदामा द्वारा लाए गए ‘तन्दुल’ (पोहे) को बड़े चाव से खाकर मित्रता का मान बढ़ाया। यह मार्मिक प्रसंग सुनकर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और पूरा माहौल ‘जय श्री कृष्णा’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
विद्वान आचार्यों का मिला सानिध्य
इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न कराने और कथा को दिव्य रूप देने में मुख्य कथावाचक कुलगुरु पंडित शेषधर मिश्र के साथ सहयोगी आचार्यों के रूप में पंडित कमल कृष्ण अनुरागी जी महाराज, पंडित आलोक पांडे जी और पंडित शंभूनाथ पांडे जी का विशेष योगदान रहा। आचार्यों के दिव्य वेद मंत्रोच्चार, सुमधुर भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों ने सात दिनों तक क्षेत्र को कंस की नगरी से हटाकर साक्षात गोकुल धाम बना दिया।

हजारों श्रद्धालुओं की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस दिव्य श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रतिदिन और विशेषकर अंतिम दिन विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा में मुख्य रूप से श्री गोपीनाथ तिवारी, सत्येंद्र दुबे, बबुआ दुबे, गोपाल पांडे, इंद्रमणि मिश्रा, विवेक मिश्रा, विजय तिवारी, अजय तिवारी, उमेश तिवारी, रमेश तिवारी, गणेश तिवारी, श्रीकांत तिवारी एवं सुभाष चंद्र मिश्रा आदि प्रबुद्ध जन सहित हजारों की संख्या में क्षेत्र के श्रद्धालु और माताएं-बहनें मौजूद रहीं। सभी ने कथा श्रवण के उपरांत व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया। कथा की पूर्णाहुति के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें आए हुए हजारों भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया।








