संस्कृत में भी आ सकते हैं गणित जैसे शत-प्रतिशत अंक: घबराएं नहीं, अपनाएं सटीक रणनीति

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

ABK24NEWS 

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू हो रही हैं। अक्सर परीक्षार्थियों, विशेषकर पहली बार बोर्ड परीक्षा दे रहे हाईस्कूल के छात्रों में संस्कृत जैसे विषय को लेकर एक डर या भ्रांति रहती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही रणनीति और तनाव प्रबंधन के साथ तैयारी की जाए, तो संस्कृत भाषा गणित की तरह 100% अंक दिलाने में सक्षम है।

राजकीय विद्यालय कांपा मधुपुर की संस्कृत शिक्षिका एवं मानसिक स्वास्थ्य नोडल शिक्षक श्रीमती प्रतिभा शुक्ला ने परीक्षार्थियों के लिए सफलता के कुछ खास ‘गुरु मंत्र’ साझा किए हैं:

पाठ्यक्रम को समझें, प्राथमिकता तय करें

परीक्षा से पहले आधिकारिक सिलेबस का सूक्ष्मता से विश्लेषण करें। अपठित गद्यांश, व्याकरण, अनुवाद, रचनात्मक लेखन और पाठ्यपुस्तक के प्रश्न—इनमें से जिन खंडों का अंक भार (Weightage) अधिक है, उन्हें पहले तैयार करें।

व्याकरण: पूरे अंक दिलाने की कुंजी

संस्कृत में व्याकरण सबसे स्कोरिंग सेक्शन है।

संधि, समास, कारक, धातुरूप और शब्दरूप पर विशेष ध्यान दें।

लकार और विभक्ति को रटने के बजाय समझें।

टिप: प्रतिदिन 20-30 मिनट लिखकर अभ्यास करें, इससे वर्तनी की गलतियां कम होंगी।

रटें नहीं, समझकर पढ़ें

पाठ्यपुस्तक के अध्यायों को रटने के बजाय उनके भावार्थ को समझें। महत्वपूर्ण श्लोकों को कंठस्थ करें और कठिन शब्दों के अर्थों की एक सूची बना लें। अक्सर बोर्ड परीक्षा में सीधे पाठ्यपुस्तक से ही प्रश्न पूछे जाते हैं।

लिखने की तकनीक और समय प्रबंधन

लेखन: बोर्ड परीक्षा में साफ और सुंदर लिखावट का गहरा प्रभाव पड़ता है। संस्कृत में ‘विसर्ग’ और ‘हलंत’ की छोटी सी चूक भी अंक कटवा सकती है, अतः वर्तनी पर विशेष ध्यान दें।

मॉक टेस्ट: समय प्रबंधन के लिए सप्ताह में कम से कम दो मॉडल पेपर हल करें। 3 घंटे में पेपर पूरा करने का अभ्यास आपको मुख्य परीक्षा के तनाव से बचाएगा।

सटीकता: प्रश्न के अनुरूप ही उत्तर दें, अनावश्यक विस्तार से बचें।

तनाव प्रबंधन है अनिवार्य

श्रीमती शुक्ला के अनुसार, आत्मविश्वास ही सफलता की पहली सीढ़ी है। परीक्षार्थी अंतिम सप्ताह में केवल रिवीजन (पुनरावृत्ति) करें और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नियमित 1 से 2 घंटे की पढ़ाई और सकारात्मक सोच आपको उत्कृष्ट परिणाम दिला सकती है।

“संस्कृत का पाठ्यक्रम अत्यंत सटीक और सीमित है। निरंतर अभ्यास और सही तकनीक से कोई भी छात्र इसमें पूरे अंक प्राप्त कर सकता है।”

— श्रीमती प्रतिभा शुक्ला, नोडल शिक्षक (मानसिक स्वास्थ्य)

ABK 24 News
Author: ABK 24 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें