प्रतापगढ़ कलेक्ट्रेट में ‘न्याय’ का वनवास: 47 दिन, 2 भ्रष्ट अफसर और बेबस प्रशासन!

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प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को प्रतापगढ़ के अधिकारी किस कदर ठेंगा दिखा रहे हैं, इसकी जीती-जागती मिसाल कलेक्ट्रेट परिसर में पिछले 47 दिनों से देखने को मिल रही है। 22 दिसंबर 2025 से कड़ाके की ठंड और अब बदलते मौसम के बीच अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह का सत्याग्रह जारी है, लेकिन जिले के आला अफसरों की ‘चुप्पी’ कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

लेखपाल और सचिव पर ‘फर्जीवाड़े’ के गंभीर आरोप

​अधिवक्ता अनिल सिंह का सीधा मोर्चा भ्रष्टाचार में लिप्त उन दो चेहरों के खिलाफ है जिन्होंने शासन तक को गुमराह कर डाला। आरोप है कि लेखपाल बलराम सरोज और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) शांति प्रकाश शर्मा ने न केवल फर्जी आख्या लगाकर जांच को प्रभावित किया, बल्कि भू-माफियाओं के साथ साठगांठ कर सरकारी जमीन को निगलने का रास्ता साफ किया।

क्या है पूरा मामला?

​मामला नगर पंचायत मांधाता बाजार (ग्राम कटाता) के वार्ड नंबर 7 का है, जहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं:

  • मानक विहीन निर्माण: डूडा द्वारा कराई जा रही इंटरलॉकिंग में घटिया सामग्री का प्रयोग।
  • भू-माफियाओं को संरक्षण: नवीन परती की कीमती भूमि (गाटा संख्या 65, 66, 142) पर कब्जे के लिए रास्ते को अवैध तरीके से घुमाने की साजिश।
  • बाल श्रम का मुद्दा: ठेकेदार द्वारा बिहार से लाए गए मासूम बच्चों से मजदूरी कराने का संगीन मामला।
  • धन का गबन: पूर्व के कार्यों के अवशेष धन की रिकवरी और तत्कालीन VDO पर FIR की मांग।

वकीलों की गर्जना: “ये केवल अनिल सिंह की नहीं, पूरे जिले के सम्मान की लड़ाई है”

​आज कलेक्ट्रेट में उस समय हड़कंप मच गया जब सैकड़ों अधिवक्ता एकजुट होकर अनिल सिंह के समर्थन में उतर आए। वरिष्ठ अधिवक्ता शिव प्रसाद त्रिपाठी, हरिश्चंद्र शुक्ल और लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रशासन एक अधिवक्ता की जायज मांगों को अनसुना कर लोकतंत्र का गला घोंट रहा है। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन कलेक्ट्रेट के कमरों तक पहुंचेगा।

“जब तक जिलाधिकारी स्वयं ग्राम कटाता को गोद लेकर विकास कार्यों की निगरानी शुरू नहीं करते और भ्रष्ट अधिकारियों को जेल नहीं भेजा जाता, यह सत्याग्रह खत्म नहीं होगा। 

अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह

 

(अधिकारियों के लिए चुभते सवाल):

​क्या प्रतापगढ़ प्रशासन को 47 दिनों से बैठा एक अधिवक्ता नजर नहीं आ रहा? क्या लेखपाल और सचिव इतने रसूखदार हैं कि उन पर कार्रवाई करने में फाइलें कांप रही हैं? मुख्यमंत्री के आदेशों को ठंडे बस्ते में डालने वाले इन अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?

धरना  स्थल पहुंचे जिलाधिकारी, फाइलें खंगालीं

आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच जिलाधिकारी ने स्वयं धरना स्थल पर पहुंचकर अधिवक्ता अनिल सिंह से मुलाकात की। इस दौरान अनिल सिंह ने भ्रष्टाचार के पुलिंदे (तमाम साक्ष्य और दस्तावेज) जिलाधिकारी के समक्ष खोल कर रख दिए। अधिवक्ता ने एक-एक बिंदु पर अधिकारियों की सांठगांठ और सरकारी धन की लूट का कच्चा चिट्ठा पेश किया। दस्तावेजों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रकरण की ‘पुनः निष्पक्ष जांच’ कराने का भरोसा दिया है। हालांकि, अधिवक्ता का साफ कहना है कि “जांच के नाम पर पहले भी गुमराह किया गया है, अब लड़ाई सीधे कार्रवाई और रिकवरी तक जारी रहेगी।”

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Author: ABK 24 News

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