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विनय पाठकः
प्रतापगढ़। दिलीपपुर-पृथ्वीगंज क्षेत्र के हजारों राहगीरों और वाहन चालकों को पृथ्वीगंज बाजार से जोड़ने वाले सई नदी पर बने दिलीपपुर पुल की हालत उसके निर्माण के महज 10 साल के भीतर ही अत्यंत दयनीय हो चुकी है। वर्ष 2015 में निर्मित हुआ यह पुल अब भारी भ्रष्टाचार और निर्माण कार्यों में मानकों की अवहेलना की कहानी बयां कर रहा है।

स्लैब में दिखने लगीं सरिया, मंडरा रहा खतरा
पुल के स्लैब में जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं और ऊपरी सतह पर लोहे की सरिया साफ दिखाई दे रही हैं। यह स्थिति पुल की संरचनात्मक मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस पुल से प्रतिदिन हजारों की संख्या में मोटर गाड़ियां और राहगीर गुजरते हैं। क्षेत्रीय लोगों को डर है कि अगर समय रहते इसका मरम्मत कार्य नहीं कराया गया, तो कहीं बिहार में पुल ढहने जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना यहाँ भी न दोहराई जाए।

लोगों में आक्रोश, लगे भ्रष्टाचार के आरोप
स्थानीय निवासियों ने इस दयनीय स्थिति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। वर्षों की मांग के बाद करोड़ों के बजट से निर्मित हुए इस पुल की 10 साल में ही ऐसी हालत यह बताने के लिए पर्याप्त है कि इसके निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और निर्माण मानकों की अनदेखी की गई है।
स्थानीय लोगों ने व्यक्त की पीड़ा
हुमायूँपुर निवासी बटाटू ने बताया कि बाइक लेकर चलने में डर लगता है कि कहीं ध्यान न दिए तो कोई सरिया गाडी के टायर में न घुस जाए।
विजय मिश्रा: काम ढंग से हुआ नहीं लगता। करोड़ों के बजट से पास पुल 10 वर्षों में ही दयनीय स्थिति में नहीं होता।
राजमूरतः पुल की खराबी से ही कोठियाही निवासी विवेक सिंह बाइक से गिरे थे, जिसके कारण वो आज तक अपाहिज की जिंदगी जी रहे हैं। हालत यही रहे तो इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन से समय पर मरम्मत की मांग
यात्रियों और क्षेत्रीय लोगों ने एक स्वर में प्रशासन से अपील की है कि वे तुरंत इस गंभीर मामले का संज्ञान लें। उनका कहना है कि जनहित और बड़ी दुर्घटना से बचाव के लिए प्रशासन को बिना विलंब किए पुल की मरम्मत का कार्य शुरू कराना चाहिए। अगर जल्द ही इस जर्जर पुल की सुध नहीं ली गई, तो दिलीपपुर और पृथ्वीगंज के बीच आवागमन पूरी तरह ठप हो सकता है, जिसका खामियाजा हजारों लोगों को भुगतना पड़ेगा।








