सुदामा कृष्ण की मित्रता का वर्णन सुनकर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
- अंतिम दिन भक्तों ने ग्रहण किया श्रीमद्भागवत कथा का रसपान।
प्रतापगढ़। मित्रता की कहानी कौन नहीं जानता, भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की मित्रता संसार में आज लोगों को अनेकों सीख दे रही है। उक्त बातें रानीगंज तहसील क्षेत्र के कसेरुआ दुबेपट्टी गांव में राजेश शुक्ला के यहां प्रयागराज से पधारे कथा व्यास स्वामी श्री शिवम प्रपन्नाचार्य जी महाराज (पंडित प्रियांशु जी वत्स) ने अपने मुखर बिंदु से श्रोताओं के समक्ष कही। उन्होंने आगे कहा कि किसी से मित्रता करिए तो सुदामा कृष्ण की तरह करें, जिसकी प्रशंसा पूरा संसार करें। भगवान सिर्फ प्रेम के ही भूखे हैं, प्रेम से भगवान को खोजना अत्यंत सरल है। जैसे सुदामा का नाम सुनते हैं भगवान दौडे चले आए। इसके पश्चात कथा व्यास ने भगवान के 16108 विवाह का प्रसंग, प्रद्युम्न का अवतरण, दाऊ जी का वृंदावन में हल, मूसल पटक कर यमुना जी को बुलाना, दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का वर्णन एवं भगवान कल्कि अवतार की कथा का वर्णन को भी बताया।
कथा समाप्ति पर कथा व्यास शिवम जी महाराज ने कहा कि आज भी भगवान श्रीमद् भागवत के रूप में हमारे बीच में है उन्हें सिर्फ भाव से समझने की जरूरत है। कथा समाप्ति के पश्चात श्रीमद् भागवत भगवान की आरती हुई। उसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से निखिल नितिन प्रियांशु शोभित, अंकित, आदित्य, अक्षत, सोनू विश्वकर्मा, बृजेश विश्वकर्मा, समेत तमाम ग्रामीण मौजूद रहे। मुख्य यजमान अनारा देवी एवं उनके पुत्र राजेश शुक्ला, अरुण शुक्ला, कपिल शुक्ला मौजूद रहे। कथा में आए श्रद्धालुओं का मुख्य यजमान ने आभार प्रकट किया।








